मुंबई: (Ajit Pawar )आज शाम 5 बजे मुंबई के ऐतिहासिक आज़ाद मैदान में महाराष्ट्र की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा। बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री पद की, जबकि एकनाथ शिंदे और अजित पवार (Ajit Pawar ) उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। लेकिन इस समारोह से पहले अजित पवार (Ajit Pawar ) के एक बयान ने महायुति की सियासी फिजा में हलचल पैदा कर दी है।
अजित पवार ने कहा, “सभी मंत्रियों का शपथ ग्रहण आज ही होना चाहिए था। हरियाणा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में ऐसा ही होता है।” उनके इस बयान ने महायुति की आंतरिक एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिर्फ तीन चेहरे, बाकी क्यों पीछे?
अब तक किसी अन्य विधायक को शपथ ग्रहण के लिए बुलावा नहीं दिया गया है। शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता संजय शिरसाट ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि बाकी मंत्रियों का शपथ ग्रहण 12 या 13 दिसंबर तक होगा। लेकिन सवाल उठता है कि आखिर यह देरी क्यों?
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महायुति में दरार या दिखावा?
शपथ ग्रहण से पहले की गई प्रेस वार्ता में महायुति के नेताओं ने परस्पर विश्वास और एकजुटता का दावा किया था। लेकिन अजित पवार के बयान ने इस दावे की पोल खोल दी है। क्या यह वास्तव में आंतरिक असहमति का संकेत है, या सिर्फ एक रणनीतिक निर्णय?
आगे क्या?
शपथ ग्रहण के बाद महायुति सरकार पर बारीकी से नजर रखनी होगी। राजनीतिक समीकरण कितनी जल्दी बदल सकते हैं, यह महाराष्ट्र की राजनीति में पहले भी देखा जा चुका है। अब सवाल यह है कि सत्ता में आने के बाद क्या यह महागठबंधन अपनी साख बचा पाएगा, या अंदरूनी मतभेद सरकार की स्थिरता पर भारी पड़ेंगे?
आज का शपथ ग्रहण सिर्फ तीन नेताओं का नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीतिक दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण अध्याय होगा।